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बन गयी है आदमिय्यत की निशानी करबला

کربلا/ ‏करबलाبن   گئی   ہے   آدمیت   کی  نشانی  کربلا کر  رہی  ہے اب دلوں  پر حکمرانی  کربلا. ‏बन  गई है  आदमीय्यत  की निशानी करबलाकर रही है अब दिलों पर हुक्मरानी करबला।عزم ہو ابن مظاہر سا تو کچھ ہی دیر میںبخش  دیتی  ہے ضعیفی کو جوانی کربلا.अ़ज़्म हो इब्ने मज़ाहिर सा तो कुछ ही देर मेंबख़्श  देती है  ज़ईफ़ी को जवानी करबला।پتھروں  کو  پوجنے  والے حسینی ہو گئےوائے ہو تم پر ابھی تم نے نہ جانی کربلا. ‏पत्थरों   को   पूजने   वाले    हुसैनी   हो   गयेवाए हो तुम पर अभी तुमने न जानी करबला।چودہ صدیوں سے عزائے شاہ دیں کی شکل میںکر   رہی  ہے دینِ حق  کی   پاسبانی  کربلا. ‏चौदह सदियों से अज़ाए शाहे दीं की शक्ल मेंकर रही है दीने हक़ की पासबानी करबला।تاابد ہے غیر ممکن دہر میں جسکی مثالہے  وفا  و صبر کی  ایسی  کہانی کربلا. ‏ताअबद है ग़ैर मुमकिन दहर में जिसकी मेसालहै वफ़ा ...

قطعات ‏

अज़मत है इसलिए भी ये मुहर्रम की मुनफ़रिद नज़दीक़े   किबरिया   है  महीना  नजात   का। हैय्या अ़लल  फ़लाह   है  हैय्या  अ़लल  हुसैन  दर  अस्ल   हैं   हुसैन  सफ़ीना   नजात   का। असकरी आ़रिफ़ निसार  करके  रहे   हक़  में   हमशबीहे   नबी वफ़ा के ख़ास मआनी  हुसैन (अ.स.) देते हैं। जवान   बेटे   के   सीने    से   खैंचकर   नैज़ा  ख़ुदा के दीं को जवानी  हुसैन (अ.स.)देते हैं। मुसाबरत=सब्र असकरी आ़रिफ़ نثار    کرکے  رہِ   حق    میں   ہمشبیہ  نبی ص.  وفا  کے خاص  معانی  حسین  ع.  دیتے    ہیں جوان   بیٹے  کے   سینے   سے   کھینچکر  نیزا خدا کے  دیں کو  جوانی  حسین ع. دیتے ہیں عسکری عارف फ़राज़े   नोके...